Gaban (???)
by
Premchand
Book Details
Format
Paperback / Softback
ISBN-10
817182250Y
ISBN-13
9798171822507
Publisher
Repro India Limited
Imprint
Diamond Books
Country of Manufacture
GB
Country of Publication
GB
Publication Date
Mar 15th, 2021
Print length
274 Pages
Weight
352 grams
Product Classification:
Modern & contemporary fiction (post c 1945)
Ksh 3,000.00
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Quality
Fast
मशी परमचद वरग विशष क नही, जन-सामानय क लखक थ। सामाजिक समसयाओ को उजागर करना उनक औपनयासिक लखन का मखय धयय रहा। गबन का मल विषय ह महिलाओ का पति क जीवन पर परà¤à¤¾à¤µà¥¤
'गबन' की नायिका, जालपा, à¤à¤• चनदरहार पान क लिठलालायित ह। उसका पति कम वतन पान वाला कलरक ह यदयपि वह अपनी पतनी क सामन बहत अमीर होन का अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ करता ह। अपनी पतनी को सतषट करन क लिठवह अपन दफरतर स गबन करता ह और à¤à¤¾à¤—कर कलकतता चला जाता ह जहा à¤à¤• कजडा और उसकी पतनी उस शरण दत ह। डकती क à¤à¤• जाली मामल म पलिस उस पफसाकर मखबिर की à¤à¤®à¤¿à¤•ा म परसतत करती ह।
उसकी पतनी परिताप स à¤à¤°à¥€ कलकतता आती ह और उस जाल स निकालन म सहायक होती ह। इसी बीच पलिस की तानाशाही क विर( à¤à¤• बडी जन-जागति शर होती ह। इस उपनयास म विराट जन-आनदोलनो क सपरश का अनà¤à¤µ पाठक को होता ह। लघ घटनाओ स आरठहोकर राषटरीय जीवन म बड-बड तपफान उठखड होत ह। à¤à¤• कषदर वतति की लोà¤à¥€ सतराी स राषटर-नायिका म जालपा की परिणति परमचद की कलम की कलातमकता की पराकाषठा ह
'गबन' की नायिका, जालपा, à¤à¤• चनदरहार पान क लिठलालायित ह। उसका पति कम वतन पान वाला कलरक ह यदयपि वह अपनी पतनी क सामन बहत अमीर होन का अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ करता ह। अपनी पतनी को सतषट करन क लिठवह अपन दफरतर स गबन करता ह और à¤à¤¾à¤—कर कलकतता चला जाता ह जहा à¤à¤• कजडा और उसकी पतनी उस शरण दत ह। डकती क à¤à¤• जाली मामल म पलिस उस पफसाकर मखबिर की à¤à¤®à¤¿à¤•ा म परसतत करती ह।
उसकी पतनी परिताप स à¤à¤°à¥€ कलकतता आती ह और उस जाल स निकालन म सहायक होती ह। इसी बीच पलिस की तानाशाही क विर( à¤à¤• बडी जन-जागति शर होती ह। इस उपनयास म विराट जन-आनदोलनो क सपरश का अनà¤à¤µ पाठक को होता ह। लघ घटनाओ स आरठहोकर राषटरीय जीवन म बड-बड तपफान उठखड होत ह। à¤à¤• कषदर वतति की लोà¤à¥€ सतराी स राषटर-नायिका म जालपा की परिणति परमचद की कलम की कलातमकता की पराकाषठा ह
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